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ERCP Project: भाजपा की सरकार आते ही ERCP को किया साफ, जानें नई डीपीआर से क्या होगा किसानों को फायदा

ERCP Project:
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ERCP Project:  राजस्थान में बीजेपी सरकार बनने के साथ ही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का रास्ता लगभग साफ हो गया है. बुधवार को दिल्ली में मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच हुई बैठक में नए एमओयू पर सहमति बनी. संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल रिवर इंटरलिंक (पीकेसी) परियोजना में अब ईआरसीपी का कार्य किया जाएगा। अगले महीने दोनों राज्यों में एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे. बैठक में एमपी-राजस्थान के अधिकारियों के अलावा जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए. संशोधित परियोजना पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

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90 फीसदी राशि केंद्र सरकार वहन करेगी. यानी 45,000 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी. दोनों राज्य अपने-अपने क्षेत्र में होने वाले खर्च का 10 फीसदी भुगतान करेंगे. राजस्थान का हिस्सा करीब 3725 करोड़ रुपये होगा. पिछली वसुंधरा सरकार के समय बनी डीपीआर में ईआरसीपी की 37 हजार करोड़ रुपए की योजना थी. विधानसभा चुनाव के दौरान ईआरसीपी योजना को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच खूब आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हुई थी. पूर्वी राजस्थान के लिए यह चुनावी मुद्दा भी था.

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ERCP Project
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ERCP Project:  पिछली गहलोत सरकार ने 14 हजार करोड़ रुपये दिये थे

ईआरसीपी पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों के लिए एक पेयजल और सिंचाई परियोजना है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल के दौरान इस योजना के लिए 14,200 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था. ईसरदा बांध एवं नवनेरा बैराज निर्माणाधीन है। रामगढ़-महालपुर-नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक पर भी काम शुरू किया गया।

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ERCP Project:  राजस्थान का हिस्सा अब 3,725 करोड़ रुपये होगा

ईआरसीपी को संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल रिवर इंटरलिंक (पीकेसी) के तहत किया जाएगा। केंद्र सरकार ने 90:1 में वित्तीय सहायता का आश्वासन दिया है इसका मतलब है कि राजस्थान को अपने क्षेत्र में होने वाले खर्च का सिर्फ 10 फीसदी ही वहन करना होगा. इससे राज्य सरकार पर करीब 3725 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.

ERCP Project: ईआरसीपी पूर्वी राजस्थान

ईआरसीपी पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में 2.80 लाख हेक्टेयर सिंचाई और उद्योगों को पानी की आपूर्ति करेगा। संशोधित एमओयू में पूर्वी राजस्थान में 26 बांधों का पुनर्वास शामिल है। हालांकि गहलोत सरकार ने इसमें 53 और बांध जोड़े थे, लेकिन अब यह स्पष्ट नहीं है कि नए एमओयू में इन्हें शामिल किया जाएगा या नहीं?

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ERCP Project:  किसान महापंचायत ने कहा कि राजस्थान को मिलने वाले पानी की मात्रा कम कर दी जाएगी

किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने नए एमओयू पर आपत्ति जताई. पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना में 2017 की डीपीआर के अनुसार राजस्थान को 3510 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलना है। इससे 2,02,485 हेक्टेयर नये सिंचित क्षेत्र का सृजन होगा। साथ ही 80,878 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी.

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ERCP Project:  1775 मिलियन क्यूबिक मीटर

केंद्र द्वारा पार्वती, कालीसिंध और चंबल लिंक परियोजनाओं को शामिल करने के बाद राजस्थान को मिलने वाले पानी की मात्रा 1775 मिलियन क्यूबिक मीटर हो जाएगी. जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इसका अनुमान 2464 मिलियन घन मीटर है। इसमें 689 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी शामिल हुआ है। इस जल प्रवाह का स्रोत पेयजल के उपयोग से बचे हुए पानी का संग्रह बताया गया है जो व्यावहारिक नहीं है।”

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रामपाल कहते हैं कि भारत सरकार के नए मानकों के अनुसार प्रति व्यक्ति 55 लीटर प्रतिदिन पानी की आवश्यकता के लिए 13 जिलों को 2154.375 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक पानी की आवश्यकता है। नये एमओयू के अनुसार यह मात्र 1775 मिलियन घन मीटर है।

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